यह स्रोत CTET पेपर 1 (कक्षा 1 से 5) के लिए विस्तृत आधिकारिक पाठ्यक्रम और अंकों के वितरण की जानकारी प्रदान करता है। इसमें बाल विकास, गणित, पर्यावरण अध्ययन और भाषा जैसे मुख्य विषयों को कवर करने वाले पांच महत्वपूर्ण खंडों को समझाया गया है।
प्रत्येक अनुभाग को विषय वस्तु और शिक्षण पद्धति (शिक्षाशास्त्र) के बीच समान रूप से विभाजित किया गया है ताकि अभ्यर्थी की अकादमिक और व्यावहारिक समझ दोनों का आकलन हो सके। लेख इस बात पर जोर देता है कि छात्रों को परीक्षा में सफलता पाने के लिए प्रासंगिक टॉपिक्स पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी तैयारी को सही दिशा में ले जाना चाहिए।
अंततः, यह गाइड शिक्षकों के लिए आवश्यक मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों, मूल्यांकन विधियों और समावेशी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
सीटीईटी पेपर एक के आधिकारिक पाठ्यक्रम की संरचना और मुख्य विषय क्या हैं?
सीटीईटी (CTET) पेपर 1 का पाठ्यक्रम कक्षा 1 से 5 के शिक्षकों के लिए निर्धारित है और इसे मुख्य रूप से पाँच भागों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक भाग में विशिष्ट विषयों और शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) का संतुलन रखा गया है।
यहाँ आधिकारिक पाठ्यक्रम की विस्तृत संरचना दी गई है:
1. बाल विकास और अध्यापन (Child Development and Pedagogy) - कुल 30 प्रश्न यह खंड तीन मुख्य उप-भागों में बंटा है:
• बाल विकास (15 प्रश्न): इसमें विकास की अवधारणा, आनुवंशिकता और पर्यावरण का प्रभाव, और समाजीकरण की प्रक्रिया (माता-पिता, शिक्षक, साथी) शामिल हैं। इसके अलावा, पियाजे, कोहलबर्ग और वायगोत्स्की के सिद्धांत, बाल-केंद्रित शिक्षा, बहुआयामी बुद्धि, और शिक्षार्थियों के बीच व्यक्तिगत अंतर (भाषा, जाति, लिंग आदि के आधार पर) जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) भी इसी का हिस्सा है।
• समावेशी शिक्षा (5 प्रश्न): इसमें वंचित और कमजोर वर्गों सहित विविध पृष्ठभूमि के बच्चों की जरूरतों को समझना, सीखने में कठिनाई ('अशक्तता') वाले बच्चों और प्रतिभाशाली छात्रों को संबोधित करना शामिल है।
• सीखना और शिक्षाशास्त्र (10 प्रश्न): यह समझने पर केंद्रित है कि बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं, वे असफल क्यों होते हैं, और प्रेरणा (Motivation) व सीखने में योगदान देने वाले कारक क्या हैं,। इसमें बच्चों की 'त्रुटियों' को सीखने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखने पर जोर दिया गया है।
2. गणित (Mathematics) - कुल 30 प्रश्न
• विषय वस्तु (15 प्रश्न): इसमें ज्यामिति, आकार, हमारे चारों ओर के ठोस पदार्थ, संख्याएँ, जोड़ना-घटाना, गुणा, विभाजन, मापन, भार, समय, आयतन, आँकड़े प्रबंधन (Data Handling), पैटर्न और पैसा (Money) शामिल हैं,।
• अध्यापन संबंधी मुद्दे (15 प्रश्न): इसमें गणित की प्रकृति, तार्किक सोच, पाठ्यचर्या में गणित का स्थान, गणित की भाषा, सामुदायिक गणित, त्रुटि विश्लेषण, और निदानात्मक व उपचारात्मक शिक्षण जैसे विषय हैं।
3. पर्यावरण अध्ययन (EVS) - कुल 30 प्रश्न
• विषय वस्तु (15 प्रश्न): यह छह मुख्य थीम्स पर आधारित है: परिवार और मित्र (जिसमें रिश्ते, कार्य, खेल, पशु और पौधे शामिल हैं), भोजन, आश्रय, जल, यात्रा, और 'चीजें जो हम बनाते हैं और करते हैं'।
• अध्यापन संबंधी मुद्दे (15 प्रश्न): EVS की अवधारणा और महत्व, एकीकृत EVS, सीखने के सिद्धांत, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के साथ संबंध, क्रियाकलाप, प्रयोग, चर्चा, और शिक्षण सामग्री (Teaching Materials)।
4. भाषा - 1 (Language I) - कुल 30 प्रश्न
• भाषा समझ (15 प्रश्न): इसमें दो अपठित गद्यांश पूछे जाते हैं—एक गद्य या नाटक और एक कविता। प्रश्न समझ, निष्कर्ष, व्याकरण और मौखिक क्षमता पर आधारित होते हैं।
• भाषा विकास का शिक्षाशास्त्र (15 प्रश्न): इसमें भाषा अर्जन (Acquisition) और अधिगम, भाषा शिक्षण के सिद्धांत, सुनने और बोलने की भूमिका, व्याकरण की भूमिका, विविध कक्षा में चुनौतियाँ, भाषा कौशल और उपचारात्मक शिक्षण शामिल हैं,।
5. भाषा - 2 (Language II) - कुल 30 प्रश्न
• समझ (15 प्रश्न): इसमें दो अपठित गद्य गद्यांश (tarkmulak, साहित्यिक, कथात्मक या वैज्ञानिक) होते हैं, जिन पर समझ और व्याकरण से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
• भाषा विकास का शिक्षाशास्त्र (15 प्रश्न): इसका पाठ्यक्रम भाषा-1 के समान ही है, जिसमें अधिगम, शिक्षण सिद्धांत, व्याकरण की भूमिका, भाषा कौशल, मूल्यांकन और शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) शामिल हैं,।
संक्षेप में: सीटीईटी पेपर 1 का पाठ्यक्रम न केवल विषय के ज्ञान (Content) पर केंद्रित है, बल्कि यह इस बात पर भी उतना ही जोर देता है कि बच्चों को वह विषय कैसे पढ़ाया जाए (Pedagogy)। लगभग हर विषय में 50% अंक विषय वस्तु के लिए और 50% अंक शिक्षण पद्धति के लिए निर्धारित किए गए हैं
बाल विकास शिक्षाशास्त्र
बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (Child Development and Pedagogy) सीटीईटी पेपर 1 का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह केवल एक विषय नहीं है, बल्कि यह वह आधार है जिस पर एक शिक्षक का पूरा शिक्षण टिका होता है। आधिकारिक पाठ्यक्रम के अनुसार, इस भाग से कुल 30 प्रश्न पूछे जाते हैं।
इन 30 प्रश्नों को पाठ्यक्रम में तीन प्रमुख उप-खंडों में विभाजित किया गया है, जिसका विवरण निम्नलिखित है:
1. बाल विकास (प्राथमिक विद्यालय का बालक) - 15 प्रश्न यह खंड सबसे बड़ा है और इसका मुख्य उद्देश्य 6 से 11 वर्ष के बच्चे के मनोविज्ञान को समझना है। इसके अंतर्गत महत्वपूर्ण बिंदु ये हैं:
• विकास और सीखना: विकास की अवधारणा क्या है और इसका सीखने (Learning) के साथ क्या संबंध है।
• आनुवंशिकता और पर्यावरण: बच्चे के विकास पर उसकी विरासत (Genes) और उसके आसपास के माहौल का क्या प्रभाव पड़ता है।
• प्रमुख सिद्धांतकार: इसमें पियाजे, कोहलबर्ग और वायगोत्स्की के सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया गया है। आपको यह समझना होगा कि ये मनोवैज्ञानिक बच्चों के बुद्धि निर्माण और नैतिक विकास को किस नजरिए (विवेचनात्मक दृष्टिकोण) से देखते हैं।
• सामाजिक और व्यक्तिगत मुद्दे: समाजीकरण की प्रक्रिया में शिक्षक, माता-पिता और साथियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। साथ ही, जेंडर (लिंग) को एक सामाजिक संरचना के रूप में समझना और कक्षा में व्यक्तिगत अंतर (भाषा, जाति, समुदाय आदि) को संबोधित करना भी शामिल है।
• आकलन: सीखने के लिए आकलन (Assessment for learning) और सीखने का आकलन (Assessment of learning) के बीच अंतर समझना, साथ ही सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) की जानकारी होना आवश्यक है।
2. समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समझना - 5 प्रश्न यह खंड आधुनिक शिक्षा प्रणाली की रीढ़ है। इसमें यह जांचा जाता है कि एक शिक्षक विविध पृष्ठभूमि के बच्चों को कैसे संभालता है:
• इसमें वंचित और कमजोर वर्गों के बच्चों की जरूरतों को पूरा करना शामिल है।
• शिक्षक को 'अशक्तता' (Disability) या सीखने में कठिनाई का सामना कर रहे बच्चों की पहचान और सहायता करनी आनी चाहिए।
• साथ ही, प्रतिभाशाली (Gifted) और रचनात्मक बच्चों को कक्षा में कैसे व्यस्त और प्रेरित रखा जाए, यह भी इस खंड का हिस्सा है।
3. सीखना और शिक्षाशास्त्र (Learning and Pedagogy) - 10 प्रश्न यह खंड "शिक्षण की कला" पर केंद्रित है। यह रटने की बजाय समझने पर जोर देता है:
• बच्चे कैसे सीखते हैं: इसमें यह समझा जाता है कि बच्चे सोचते कैसे हैं और वे स्कूल में असफल क्यों होते हैं।
• बच्चे की भूमिका: पाठ्यक्रम बच्चे को एक 'समस्या समाधानकर्ता' और 'वैज्ञानिक अन्वेषक' के रूप में देखता है।
• त्रुटियों का महत्व: बच्चों द्वारा की गई गलतियों या 'त्रुटियों' को नकारात्मक रूप में नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।
• प्रेरणा और संवेग: सीखने में संज्ञान (Cognition) और भावनाओं (Emotions) का क्या रोल है और बच्चों को आंतरिक रूप से कैसे प्रेरित किया जाए।
निष्कर्ष: इस पाठ्यक्रम का सार यह है कि शिक्षक को "ज्ञान देने वाले" (Information Giver) की भूमिका से हटकर "सुविधादाता" (Facilitator) की भूमिका निभानी है।
सादृश्य (Analogy): इसे ऐसे समझें कि बाल विकास का यह पाठ्यक्रम एक शिक्षक को माली की तरह तैयार करता है। माली को न केवल यह पता होना चाहिए कि पौधे (बच्चे) कैसे बढ़ते हैं (बाल विकास), बल्कि यह भी पता होना चाहिए कि अगर किसी पौधे को विशेष देखभाल की जरूरत है तो उसे कैसे खाद-पानी देना है (समावेशी शिक्षा), और अंत में, उसे बागवानी की सही तकनीकें (शिक्षाशास्त्र) आनी चाहिए ताकि हर पौधा अपनी पूरी क्षमता से खिल सके।